Pizza खाने की चाह आखिर किसे नहीं होती और वो भी तब जब कोरोनावायरस के कारण घर से बाहर pizza खाना मुश्किल हो गया है l इसीलिए लोग घर में ही pizza मंगा और खा रहें हैं l एक बड़ा ही रोचक मामला कनाडा के ओंटारियो प्रांत में देखने को मिला जहाँ एक भालू एक घर के अंदर घुस आया क्योंकि उसे pizza खाने की इच्छा हुई थी l भालू घर के दरवाज़े के थोड़ा अंदर आया जहाँ उसने नीचे पड़े pizza boxes को खोल कर देखा परन्तु उसे उनमें pizza नहीं मिला जिसके बाद वो पूरे कमरे की छान-बीन करके वापिस बाहर चला गया l एक भालू के सूंघने की शक्ति एक मनुष्य से लगभग 2000 गुना ज़्यादा होती है जिससे वो बड़ी आसानी से खाना ढूंढ सकते हैं l ये घटना घर के CCTV camera में record हुई जिससे घर के मालिक शॉन एटकिंसन को इसके बारे में पता चला l स्थानीय लोग इस घटना के बाद से अब ज़्यादा सतर्कता बरतने लगें हैं और और बचा खाना बाहर नहीं छोड़ रहें हैं l कानून और अपराध की रिपोर्ट
कर्पूर मंजरी - सट्टक भारतेंदु हरिश्चंद्र दोहा भरित नेह नव नीर नित, बरसत सुरस अथोर। जयति अपूरब घन कोऊ, लखि नाचत मन मोर । (सूत्रधार आता है) सूत्रधार : (घूमकर) हैं क्या हमारे नट लोग गाने बजाने लगे? यह देखो कोई सखी कपड़े चुनती है, कोई माला गूंधती है, कोई परदे बांधती है, कोई चन्दन घिसती है; यह देखो बंसी निकली, यह बीन की खोल उतरी, यह मृदंग मिलाए गए, यह मंजीरा झनका, यह धुरपद गाया गया। (कुछ ठहर कर) किसी को बुलाकर पूछे तो (नेपथ्य की ओर देख कर) अरे कोई है? पारिपाश्र्वक आता है। पारि. : कहो, क्या आज्ञा है? सूत्र. : (सोच कर) क्या खेलने की तैयारी हुई? पारि. : हां, आज सट्टक न खेलना है। सूत्र. : किस का बनाया? पारि. : राज्य की शोभा के साथ अंगों की शोभा का; और राजाओं में बड़े दानी का अनुवाद किया। सूत्र. : (विचार कर) यह तो कोई कूट सा मालूम पड़ता है (प्रगट) हां हां राजशेखर का और हरिश्चन्द्र का। पारि. : हां, उन्हीं का। सूत्र. : ठीक है, सट्टक में यद्यपि विष्कम्भक प्रवेशक नहीं होते तब भी यह नाटकों में अच्छा होता है। (सोच कर) तो भला कवि ने इस को संस्कृत ही में क्यों न बनाया, प्राकृत में क्यों बनाया? पारि...
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