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क्या आपके पास है..

ह्रदय राम का बल रावण का साहस हनुमान का प्रेम लक्षमण का मार्ग विभिषण का त्याग सीता का इनमे से आपके पास क्या है.?

जसबीर कलरवि

हमें आता है अब इस ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा कहना यहाँ मिल जाये कुछ मस्ती उसे ही मयकदा कहना चला हूँ मैं तो बस इक बूँद लेकिर मापने सागर तू अब सारे किनारों को ही मेरी अलविदा कहना जो दरिया गुनगुनाता है नदी जब राग सा छेड़े, उसे जा के समुन्दर की ज़रा आबो-हवा कहना। वो तेरी मंजिलों के सब पते ही तुम को देता है, मगर उसकी ये किस्मत तेरा उसको ला-पता कहना। जो उस-से मागते हो तुम वो कुदरत दे ही देती है, इसे अपनी दुआ समझो या फिर उसकी अदा कहना। मैं अपने हर जनम में ही मरा अपनी वफ़ा करके, मुझे कहना नहीं आया किसी को बे-वफ़ा कहना। लकीरें फिर मेरे माथे की अक्सर फट ही जाती है, मेरा जब भी किसी पत्थर को अपना आईना कहना।

हर दिन

हर दिन हर दिन एक नई शुरूआत है हर दिन एक नई ज़िन्दगी का साथ है हर दिन कुछ खोना है हर दिन एक नया मुकाम है हर दिन एक झगड़ा है हर दिन एक समझौता है हर दिन एक तमन्ना है हर दिन का रोना है हर दिन सोना है और हर दिन एक दिन का इंतज़ार है

ऐसी किस्मत हर किसी को नहीं मिलती ......

ऐसी किस्मत हर किसी को नहीं मिलती ...... आई याद मुझको शवण कुमार की गाथा कैसे फिरता था वो लेकर अपने नेत्रहीन माता-पिता न अपनी सुध...बस एक धुन कैसे करूं उनकी सेवा जो हैं मेरे जन्मदाता पर हो गई ये बात पुरानी शवण तो है बस एक कहानी ... इस युग की कहानी बदली है नाम तो है शवण पर फितरत कुछ हट के है बोझ समझता है वो उनको जिनके बाज़ूओं मे वो पला है झिड़क देता है वो उनको जिसने उसको जन्म दिया हे छोड कर चल देता है उनको जिसने उसके लिए सब छोड़ा उनकी खांसी उनकी बीमारी आज सब खलती है उसको जिसके लिए उन्होने अपनी कितनी नींदों को तोड़ा है रोते है वो शवण.. फिर भी तेरे लिए दुआ करते हैं.. सोच... क्या तुझ को जन्म देकर उन्होने कुछ ग़लत किया ये वो नियामत है जो हर किसी को नहीं मिलती इनके कदमो तले जनन्त है जो हर किसी को नहीं मिलती मां बाप की खिदमत की तौफीक हर किसी को नहीं मिलती हां ये सच है... शवण की तरह किस्मत हर किसी को नहीं मिलती ।। आई याद मुझको शवण कुमार की गाथा कैसे फिरता था वो लेकर अपने नेत्रहीन माता-पिता न अपनी सुध...बस एक धुन कैसे करूं उनकी सेवा जो हैं मेरे जन्मदाता... जो है मेरे जन्मदाता... शान...

एक कहानी हू मैं

एक कहानी हू मैं ये कविता मेरे प्रिय मित्र ज्योति त्रिपाठी जी ने भेजी है जिन्हे हम बाबा कहते है॥ अगर पंसद आए तो बाबा के नाम से संदेश भेजें.... अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं , रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया, वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं..... सबको प्यार देने की आदत है हमें, अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे, कितना भी गहरा जख्म दे कोई, उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें... इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं, सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं, जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन" जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं, आँख से देखोगे तो खुश पाओगे, दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,, "अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं".... ज्योति

इस बार

इस बार जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल जिसने दर्द दिया उसे दवा दे जिसने ज़ख्म दिया उसे मरहम दे जिसने आंसू दिए उसे सब्र दे जिसने बाण छोड़ा उसे बांह दे जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल।। इस बार बदले गी सूरत इस बार बदले गी मुर्त इस बार बदले गी तस्वीर इस बार बदले गी तकदीर जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल ।। शान....

काश.....

दिल में ग़म आंखे नम किससे बयां करूं अपना हाल कौन सुने मेरी कौन है मेरा अपनो को मैने छोड़ा औरों ने मुझको को छोड़ा कैसे चलूं मैं इस पथ जिसमे बसी है तेरी याद वो याद जो रहती हर पल मेरे साथ काश तो होती मेरी और मै होता तेरा... काश..काश ...काश...