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आप के लिये..... कितनी खामोश निगाहों ने बुलाआ मुझको । कितनी मगरूर अदाओ ने लुभाया मुझको ।। कितने दिल थे जो मेरे वास्ते बेताब रहे । कितनी आंखों ने मेरे प्यार के सपने देखे ।। नाज़नीनों ने मेरे प्यार में ,मरना सीखा। कितनी ज़ुल्फों ने मेरे ,ग़म में बिखरना सीखा ।। हर तरफ मेरे लिये हुस्न के नज़ारे थे । मेरे हमराह कभी चांद, कभी तारे थे ।। फिर भी ठुकरा दी तेरे वास्ते दुनिया मैने । किसी जलवे की तरफ मुड़ के न देखा मैंने ।। मैं तो बस तेरी निगाहों का तमन्नाई था। तेरी जुल्फों की घनी छांव का शैदाई था ।। मेरी आंखों में तेरे हुस्न की रा नाई थी । मेरे दिल में तेरी तस्वीर उतर आई थी ।। मेरे होंठों पे मचलते थे तराने तेरे । मेरी आंखों से छलकते थे फ़साने तेरे ।। मैं हमेशा तेरी जुल्फों का गिरफ्तार रहा । लबो-रूखसार की जन्नत का परस्तार रहा ।। मैंने शादाब किए तेरी मुहब्बत का चलन छोड़ दिया। मेरी उम्मीद का हर ताजमहल तोड़ दिया ।। छीन के चैन मेरा ,तोड़ के पैमाने ए दिल । करके बरबाद मेरे प्यार की रंगी महफिल ।। अब किसी औऱ की महफिल को सजाने के लिए । तूने जुल्फों को संवारा है ज़माने के लिये ।। मेरी आंखों में तेरे ग़म की न...