Posts

Showing posts with the label चांद

ऐ फिज़ाओं संभल जाऊ..

कितनी औऱ फिज़ा ... चंद्र मोहन से चांद मोहम्मद हुए, अपनी प्रेमिका को फिज़ा का नाम दिया..प्यार मोहब्बत की कसमें खाई.. घरबार छोड़ा, पत्नी से नाता तोड़ा .कुर्सी से हटाये गये ,जायदाद से बेदखल हुये.. फिज़ा के लिये .. और फिर फिज़ा को छोड़ कर लापता हो गये। फिज़ा ने खुदकुशी की कोशिश की..एक हवलदार की गोद में अस्पताल तक पहुची। चांद दिखता है खुले आकाश में, फिज़ा उसको ज्यादादेर तक छुपा कर नहीं रख सकती है ... ये हक़कीत है ..जिसे न जाने क्यों फिज़ा भूल गई और हम टीवी वालों को याद न रहा ... इस कहानी पर थोड़ी देर में आयेगें..अभी तवारिखों के पन्नों को पलट कर कुछ समझने के लिये थोड़ा पीछे चलते हैं ..धर्मेन्द्र और हेमा की शादी की तरफ...इन्होने भी इस्लाम कबूल कर शादी की ..दो बेटियों को जन्म दिया .. पर धर्मेन्द्र अपने पुराने परिवार के पास वापस चला गया.. हेमा आज कुछ भी कहे अपने सम्मान मे कसीदे पढ़े धर्मेन्द्र को सर आंखों में बिठायें पर कहीं न कहीं वो अपने को ठगा महसूस करती होगीं..आज जब भी उनके और धर्मेन्द्र का ज़िक्र आता है तो साथ ही एक लम्बी कहानी ..सब को सुनाई जाती है ..। जिस धर्म के तहत शादी की वो महज़ब छो़...