७१ साल
71 साल भाग -2 रात ही रात में घर खाली कर दिया ।पहले किसी जान पहचान वाले के यहां रहे फिर एक कमरा किराये पर ले लिया।रामनेरश ने अपनी तीन बेटियो और पत्नी के साथ ज़िन्दगी को नए सिरे से शुरू किया ।स्कूल दूर था सुबह जल्दी निकलते रात को देर तक टूयशन पढ़ा कर घर वापस आते ।अभी बहुत कुछ करना है बच्चियों की पढ़ाई एक अपना घर ... यही उनका सपना था ।न अपने खाने की फिक्र न पहने का होश दो जोडी कपड़े, एक जोड़ी रबड़ की चप्पल और एक साइकिल.. यही था रामनरेश के पास ..बीवी की भी कमोबोश ऐसी ही हालत थी। जहां टूयशन पढ़ाने जाते थे उन बच्चों के पिता प्रॉपर्टि डिलर थे ।उन्होने कहा मास्टर साहब एक जगह ज़मीन कट रही है एक प्लाट ले लो । रामनेरश ने कहा भाई मेरे पास इतने पैसे नहीं की ज़मीन ले सकूं.. प्रॉपर्टि डिलर ने कहा चलिए कुछ दे दिये गा और बाकि बाद में दे देना ...शारीफ आदमी पैसे बाद में दे पर देगा ज़रूर ये बात डिलर जानता था । आज रामनरेश जल्दी जल्दी घर पहुचें पत्नी को ख़बर दी ।पत्नी भी खुश हो गयी । मां बाप के खिले हुए चेहेरे देख कर बच्चो में खुशियों की लहर दौड़ गई । और क्यो न हो आखिर कुछ अपना हां अपना घर होने वाला है उन...