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हिन्द के मुसलमां है हम

हिन्द के मुसलमां है हम शुक्रे खुदा करते हैं हम सजदा-ए - हक़ अदा करते है हम दिल में बसा है मादरे वतन तुझसे मोहब्बत ए वतन करते है हम हिन्द के मुसलमां है हम इस शोरो गुल के गुबार में इन इधर उधर की पुकार में इन रंगे हुए सियार में तेरी सियासत समझते है हम हिन्द के मुसलमां है हम हिन्द के दिलो जिगर और जां है हम तिरंगे की शान है हम खुद क़ाबिज़ो मुखतार है हम वतन की पहचान है हम फिर सोचते है कुछ क्यों बिन बुलाए मेहमां है हम हिन्द के मुसलमां है हम इज्ज़त अमन और रोज़गार बस चंद अपने अरमां है जितने हम में हैं उतने ही तुम में है इतेहापसंद कुछ यहां है कुछ वहां हैं हिन्द के मुसलमां है हम इसकी मिट्टी में दफन है हम ही इसकी ख़ाक से बने है हम ही इसके गली कूचों मे चले हैं हम ही अपने पुरखों की यहीं आशियां है वासी यहां के हम हैं ये अपना मकां है हिन्द के मुसलमां है हम ....

ऱूख्सत

ऱूख्सत मुझ को दर्द है ज़माने से मैं यूही ग़मगीन रहता हूं तुझसे मिलना है हसरत मेरी हर शाम ये सोच कर सोता हूं।। दर्द का रिशता पुराना है अश्कों का दरिया बहाना है मैं कई बार टूटा यूही इस बार टूट के बिखर जाना..।। न संभालो मुझको न दो सहारा दूर कर दो साहिल को अब की बार मुझको डूब ही जाना है।। कई बार चढा, कई बार उतरा रंग हिना का हाथो से इस बार खून- ने- रंग को भी आज़माना है ।। मुझसे नफरत करो तो कर ले ऐ दोस्त मुझसे गिरया करे तो न कर ऐ दोस्त मुझसे रश्क करे तो कर ले ऐ दोस्त.. मुझसे गमोरंज करे तो न कर ऐ दोस्त.. बहुत हुई नमाज़े शुक्रआना.. शुक्र अल्लाह का कर के जाता हूं.. फिर न आऊंगा इस दुनिया में ऐ शान” पढ़ दो ऐ दोस्त मेरा नमाज़े जनाज़ा ।। शान,,