अब क्या देखें राह तुम्हारी (फैज़ अहमद फैज़)
अब क्या देखें राह तुम्हारी (फैज़ अहमद फैज़) अब क्या देखे राह तुम्हारी बीत चली है रात छोड़ो छोड़ो ग़म की बात थम गये आंसू थक गई अंखियां गुज़र गई बरसात बीत चली है रात छोड़ो छोड़ो ग़म की बात कब से आस लगी दर्शन की कोई न जाने बात बीत चली है रात छोड़ो गम की बात तुम आओ तो मन मे उतरे फूलो की बारात बीत चली है रात अब क्या देखे राह तुम्हारी बीत चली है रात