इस शाम ऐसे ही
मुझे हर बार एक बात का ग़म है मुझे हर रात उस उस बात का ग़म है.. सुब होते ही खो जाते हैं जब अपने मुझे बिखरे हुए गुलिस्तां का ग़म है सजो न पाया मैं कोई रिश्ता मुझे अपनो को, खोने का ग़म है.. ग़म न करो ऐ ग़मगीन हैदर इस दुनिया को तुम्हारे आने का ग़म है.।।