न जाने क्यों

न जाने क्यो हर बात एक बात से बढ़ जाती है
न जाने क्यों तेरी याद हर याद में बस जाती है
न जाने क्यों तेरी तस्वीर हर आंख में बन जाती है
न जाते क्यों तेरी मूर्त हर सूरत में दिख जाती है
न जाने क्यों तेरी आवाज़ हर नज़्म बन जाती है
न जाने क्यों हर जगह तुझ पर ही नज़र जाती है

Comments

Popular posts from this blog

डरे हुए नरेंद्र मोदी ......

हिन्दुओं का अंतिम संस्कार पाकिस्तान में कितना दर्दनाक