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पति पत्नी के बीच

.पत्नी सही या पति काल कोई भी हो पर पति पत्नी के संबधों में मधुरता कम और तनाव ज्यादा रहता है। कल मैं एक क्लब मैं अपने पुराने मित्र के साथ बैठा गुज़रे वक्त का ज़िक्र कर रहा था । तभी उसने मुझ से मेरे विवाहित जीवन के बारे में पुछा ..मैंने चुप रहे कर गर्दन हिला दी ..फिर कुछ देर उधर इधर की बाते होने लगी लेकिन अब मुझे उसकी बातें और याद आया गुज़रा वक्त बुरा लगने लगा था ..उसने मेरे पिता जी के बारे में पुछा कहा क्या मिलने जाते हो ..मैं खामोश हो गया और इधर उधर दिखने लगा ..वो समझ गया उने कहा कि हर ज़िन्दगी मैं कुछ ऐसे ही सवाल होते हैं..जिसके जवाब देते वक्त इसान अपनी गर्दन घुमाने लगता है ...बात को टालने लगता है ...सब के साथ ऐसा ही होता ... मैंने कहा हां ... कुछ शायद खामोश रहे कर अपना रिशता बचा रहे हैं कुछ बोल कर रिशते को आखिरी मुकाम तक ले गए हैं.. चार साल पहले मेरे एक दोस्त ने प्रेम विवाह किया उनके एक साल का लड़का भी है ..शादी के कुछ महिने मां-बाप बेटा बहू साथ रहे ..पर फिर वो ही होना शुरू हो गया जो हमेशा से होता आया है ...बात बात में झगडा लडाई.. लड़का और बहू अलग हो गए इस उम्मीद के साथ कि अब की बार...

आफगिस्तान की टैक्सी में एशर्वया राय बच्चन

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आफगिस्तान की टैक्सी में एशर्वया राय बच्चन

क्या सहारा टीवी का बदलाव कुछ रंग लाएगा...

क्या सहारा टीवी का बदलाव कुछ रंग लाएगा... नहीं कतई ही नही... ये लोग आएगे.. सब को अपना अपना कैबिन मिलेगा... एच आर के नियमों से अवगत कराया जाएगा.. सहारा की खूबियो और कानूनों के बारे में बताया जाएगा.. फिर आने वाले अपनी नई टीम बनाएगे.. दूसरे चैनलों के सारे निकम्मे और काम चोर लोग सहारा में बॉस बन जाएगे.. वहां मौजूद और कई सालों से पिसता हुआ, कम पगार, असक्षम, आयोग्य ( जैसा दूसरे चैनलों में जाना जाता है)असली सहारियन उनको सहारा प्राणम करना शुरू कर देगा... और वो अपने अनुभवो का उसके सामने बखान करना शुरू कर देगे...कि हमने वहां ऐसा किया वहा जो टीआरपी आई वो हमारी बदौलत आई... बस देखो थोड़े समय में यहां का माहौल ठीक कर देगें.. नई टीम के सदस्य अपने नए बॉस की बहुत तारीफ करेगें... और कुछ पुराने लोग जिनका काम सिर्फ नए बॉस के साथ हो जाना है उनके साथ भी खड़े हो जाएगे.. सब अपना मतलब साधेगे..चैनल में क्या दिखाना है क्या नहीं दिखाना इस पर बहस होगी..नए बॉस के दिमाग की तारीफ की जाए गई... लखनऊ तक पैगाम पहुचा दिया जाएगा.. सब से पहले चैनल का रंग बदला जाएगा..मौजूदा रंग की कड़ी आलोचना होगी और नए कलर की प्रंशसा...ज़ाह...

3इडियट्स के मारे ब्लॉग जगत फिर से सुर्खियों मे.....

3इडियट्स के मारे ब्लॉग जगत फिर से सुर्खियों मे..... 3 इडियट्स का विवाद..... चेतन भगत विधूविनोद चोपड़ा राजकुमार हिरानी और लेखक का झगड़ा जाने किस मोड़ पर खत्म होगा पर ये सच है कि इस विवाद से एक बार फिर ब्लाग की ताकात का एहसास सब को हो गया होगा... इतनी जल्दी कोई माध्यम अगर हिट हुआ है तो वो सिर्फ ब्लॉग की ही दुनिया है ..क्योकि इस पर ही होती है सिर्फ दिल की बात और दिल सच बोलता है दिमाग की तरह सोच कर नहीं ... बाकि सभी माध्यम पहले अपना फायदा देखते हैं फिर कुछ दिखाते हैं और छापते औऱ अपने मुनाफे की बात ही बताते हैं... तो दोस्तों 2010 की ब्लॉग जगत की शुरूआत ज़बरदस्त हुई है ..आगे भी ये कोशिश जारी रहे... अब की बारी आम ब्लॉगर की होनी चाहिए...उसका लेखक सुर्खियों में आना चाहिए... जय हिन्द जय ब्लॉग... गर्व करों की हम ब्लॉगर है..

इस बार

इस बार जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल जिसने दर्द दिया उसे दवा दे जिसने ज़ख्म दिया उसे मरहम दे जिसने आंसू दिए उसे सब्र दे जिसने बाण छोड़ा उसे बांह दे जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल।। इस बार बदले गी सूरत इस बार बदले गी मुर्त इस बार बदले गी तस्वीर इस बार बदले गी तकदीर जो बुरा हुआ उसे भूल जा जो है उस के साथ चल ।। शान....

मैं अपनी भतीजी से क्या कहूं।..एक दुखियारी

लड़कियों के लिए क्या बदला जन्म दिल्ली में हुआ और यहीं पर मैं पढ़ी बड़ी ..शहर के साथ मैने औऱ मेरे परिवार दोनो ने तरक्की की ..जैसा आप सब जानते है जो हाल नौकरी पेशे में होता है वो ही हमारे परिवार का था ना बहुत अच्छा कहेंगे ना बहुत बुरा । ठीक ठीक जिंदगी गुज़र बसर हुई। पर शहर में रहते और बड़े होते मैने यहां अपने साथ बहुत बदसलूकी और बदतमिजी सही। कभी किसी का विरोध किया तो वहां मौजूद लोगों ने मेरा मज़ाक ऊड़ाया। यहां तक की दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी कहा क्यों बात को बढ़ावा देती हो क्या होगा उल्टे बदनामी होगी। मैं खून के घूंट पीकर सब्र कर लेती कि वक्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा। मेरी दिल्ली सही हो जाएगी। बसों में मर्दों जिनमें छिछोरे नौजवान हो या पढ़े लिखे या फिर मनचले बुजुर्ग जो मेरे दादा कि उम्र के हुआ करते थे अक्सर मेरे पीछे चिपक जाया करते थे। जब मैं कहती ज़रा ठीक से खडे हो तो उनका जवाब आता अगर बस मे इतनी परेशानी हैं तो टैक्सी में चलाकर उनकी बात सुनकर पूरी बस हंसती । और मैं बिना गल्ती के शर्मिंदा हो जाती। बाज़ार में कोई सामान लेने जाऊं और दुकानदार बेईमानी करें और मैं उसे टोक दूं तो वो उल्टा...

ऱूख्सत

ऱूख्सत मुझ को दर्द है ज़माने से मैं यूही ग़मगीन रहता हूं तुझसे मिलना है हसरत मेरी हर शाम ये सोच कर सोता हूं।। दर्द का रिशता पुराना है अश्कों का दरिया बहाना है मैं कई बार टूटा यूही इस बार टूट के बिखर जाना..।। न संभालो मुझको न दो सहारा दूर कर दो साहिल को अब की बार मुझको डूब ही जाना है।। कई बार चढा, कई बार उतरा रंग हिना का हाथो से इस बार खून- ने- रंग को भी आज़माना है ।। मुझसे नफरत करो तो कर ले ऐ दोस्त मुझसे गिरया करे तो न कर ऐ दोस्त मुझसे रश्क करे तो कर ले ऐ दोस्त.. मुझसे गमोरंज करे तो न कर ऐ दोस्त.. बहुत हुई नमाज़े शुक्रआना.. शुक्र अल्लाह का कर के जाता हूं.. फिर न आऊंगा इस दुनिया में ऐ शान” पढ़ दो ऐ दोस्त मेरा नमाज़े जनाज़ा ।। शान,,