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किसी ने कहा-6

भीतरी दुनियाँ में गुप्‍त-चित्र या चित्रगुप्‍त पुलिस और अदालत दोनों महकमों का काम स्‍वयं ही करता है। यदि पुलिस झूठा सबूत दे दे तो अदालत का फैसला भी अनुचित हो सकता है, परंतु भीतरी दुनियाँ में ऐसी गड़बड़ी की संभावना नहीं। अंत:करण सब कुछ जानता है कि यह कर्म किस विचार से, किस इच्‍छा से, किस परिस्थिति में, क्‍यों कर किया गया था। वहाँ बाहरी मन को सफाई या बयान देने की जरूरत नहीं पड़ती क्‍योंकि गुप्‍त मन उस बात के संबंध में स्‍वयं ही पूरी-पूरी जानकारी रखता है। हम जिस इच्‍छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं, उस इच्‍छा या भावना से ही पाप-पुण्‍य का नाप होता है। भौतिक वस्‍तुओं की नाप-तोल बाहरी दुनियाँ में होती है। एक गरीब आदमी दो पैसा दान करता है और एक धनी आदमी दस हजार रूपया दान करता है, बाहरी दुनियाँ तो पुण्‍य की तौल रुपए-पैसों की गिनती के अनुसार करेगी। दो पैसा दान करने वाले की ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देखेगा, पर दस हजार रूपया देने वाले की प्रशंसा चारों ओर फैल जाएगी। भीतरी दुनियाँ में यह नाप-तोल नहीं चलती। अनाज के दाने अँगोछे में बाँधकर गाँव के बनिए की दुकान पर चले जाएँ, तो वह बदले में गुड़ देगा, पर उ...

किसी ने कहा-6

भीतरी दुनियाँ में गुप्‍त-चित्र या चित्रगुप्‍त पुलिस और अदालत दोनों महकमों का काम स्‍वयं ही करता है। यदि पुलिस झूठा सबूत दे दे तो अदालत का फैसला भी अनुचित हो सकता है, परंतु भीतरी दुनियाँ में ऐसी गड़बड़ी की संभावना नहीं। अंत:करण सब कुछ जानता है कि यह कर्म किस विचार से, किस इच्‍छा से, किस परिस्थिति में, क्‍यों कर किया गया था। वहाँ बाहरी मन को सफाई या बयान देने की जरूरत नहीं पड़ती क्‍योंकि गुप्‍त मन उस बात के संबंध में स्‍वयं ही पूरी-पूरी जानकारी रखता है। हम जिस इच्‍छा से, जिस भावना से जो काम करते हैं, उस इच्‍छा या भावना से ही पाप-पुण्‍य का नाप होता है। भौतिक वस्‍तुओं की नाप-तोल बाहरी दुनियाँ में होती है। एक गरीब आदमी दो पैसा दान करता है और एक धनी आदमी दस हजार रूपया दान करता है, बाहरी दुनियाँ तो पुण्‍य की तौल रुपए-पैसों की गिनती के अनुसार करेगी। दो पैसा दान करने वाले की ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देखेगा, पर दस हजार रूपया देने वाले की प्रशंसा चारों ओर फैल जाएगी। भीतरी दुनियाँ में यह नाप-तोल नहीं चलती। अनाज के दाने अँगोछे में बाँधकर गाँव के बनिए की दुकान पर चले जाएँ, तो वह बदले में गुड़ देगा, पर उ...

किसी ने कहा -5

देखा गया है कि जो सचमुच आत्म-कल्याण एवं ईश्वर प्राप्ति के उद्देश्य से सुख सुविधाओं को त्याग कर घर से निकले थे, उन्हें रास्ता नहीं मिला और ऐसे जंजाल में भटक गये, जहाँ लोक और परलोक में से एक भी प्रयोजन पूरा न हो सका । परलोक इसलिए नहीं सधा कि उनने मात्र कार्य कष्ट सहा और उदात्त वृत्तियों का अभिवर्द्धन नहीं कर सके । उदात्त वृत्तियों का अभिवर्द्धन तो सेवा-साधना का जल सिंचन चाहता था, उसकी एक बूँद भी न मिल सकी । पूजा-पाठ की प्रक्रिया दुहराई जाती रही, सो ठीक, पर न तो ईश्वर का स्वरूप समझा गया और न उसकी प्राप्ति का आधार जाना गया । ईश्वर मनुष्य के रोम-रोम में बसा है । स्वार्थपरता और संकीर्णता की दीवार के पीछे ही वह छिपा बैठा है । यह दीवार गिरा दी जाय तो पल भर में ईश्वर से लिपटने का आनन्द मिल सकता है । यह किसी ने उन्हें बताया होता तो निस्सन्देह इन तप, त्याग करने वाले लोगों में से हर एक को सचमुच ही ईश्वर मिल गया होता और वे सच्चे अर्थों में ऋषि बन गये होते ।

किसी ने कहा 4

मन्दिर को सजाने-सँवारने में भगवान को भुला देना निरी मूर्खता है । किन्तु देवालयों को गन्दा, तिरस्कृत, जीर्ण-शीर्ण रखना भी पाप माना जाता है । इसी प्रकार शरीर को नश्वर कहकर उसकी उपेक्षा करना अथवा उसे ही सजाने-सॅंवारने में सारी शक्ति खर्च कर देना, दोनों ही ढंग अकल्याणकारी हैं हमें सन्तुलन का मार्ग अपनाना चाहिए । शारीरिक आरोग्य के मुख्य आधार आत्म-संयम एवं नियमितता ही हैं, इनकी उपेक्षा करके मात्र औषधियों के सहारे आरोग्य लाभ का प्रयास मृगमरीचिका के अतिरिक्त और कुछ नहीं है ।

आपका रिश्ता खतरे में हैं

आपका रिश्ता खतरे में हैं एक महीना कैसे बीत गया पता नहीं चला ... खुशी के साथ नाराज़गी का ज्यादा एहसास..कुछ लोग शायद दुनिया मे खुश रहने के लिए आये ही नहीं और मेरी किस्मत कहिये या बद किस्मती की ऐसे लोगो का वास्ता मेरी दुनिया में मेरे साथ काफी है ... खुश रहना कोई फलसफा है या कोई काहनी या गणित का ऐसा सवाल जिसका हल.. गुरू के भी पसीने छुड़ा दे ।सुबह देखो तो मुंह बना हुआ है शाम को देखो तो फिर से नफरत के भाव झलक रहे हैं कारण क्या है पूछने पर नहीं बताया जाता । माना हर इंसान के पास हर चीज़ नहीं होती पर ये भी तो सच्चाई है कि ऐसे भी इंसान है जिनके पास जो हो वो उसमें ही खुश रहते हैं। हमारा दायरा यानि वो घेरा जिसमें हम अपना ज्यादा वक्त गुज़ारते हैं घर हुआ दफ्तर हुआ या फिर दोस्त ... इनके साथ ,इनके पास रहने से हमे किस चीज़ का एहसास होता है। किसी बंधन का, किसी कर्ज़ का, किसी फर्ज़ का, किसी बोझ का, या फिर खुशी का ... अगर खुशी का एहसास नहीं है तो सच मानिये आपका रिश्ता खतरे में हैं । अब इससे बड़ा सवाल ये उठता है आपको कैसे पता चले कि आप खुश हैं ... जी कई लोग बनावटी और दिखावे को ही खुशी का दरवाज़ा समझते हैं ...

MRS IRSHAD

मिसेज़ इरशाद लखनऊ के चौक की तंग गलियां और गलियों में धूमती बिटन ..जहां से निकलती मुल्ला मौलवी ब्रुके पहने औरतें या फिर चौहराये पर खड़े लखनऊ के शौदे.. सभी कान में फुस से कहते रियासत की लड़की ज़रूर कोई गुल खिलाए गी।..शायद बिटन की चंचलता तेज़ तरार होना बिना बाज़ू का कुर्ता पहनना और लड़कों की साइकिल चलाना वो भी ऐसे मौहल्ले में जहां औरतों ने सिर्फ मौहल्ले के सब्ज़ी वाले या कसाई के अलावा किसी और गैर शख्स से बात ही न की हो...पर बिटन सब से जुदा और हट के है पर हां इस गलतफहमी में मत रहिए की बिटन पढाई में बहुत अच्छी होगी परिवार वाले बहुत मॉर्डन होगें अब्बा तालिम के समर्थक होगें..ऐसा कुछ नहीं बिल्कुल नहीं.. रियासत तो पांच वक्त के नमाज़ी ज्यादातर वक्त उनका मजलिस मातम रोज़े नज़र नियाज़ में गुज़रता और खाली वक्त मिलता तो वो इस परेशानी में निकल जाता की पांच पांच लड़कियों की शादी कैसे होगी.... .या मौला कोई मौज्ज़ा(चमत्कार) दिखाओ..या इमामे ज़माना तुम्ही अपना करिशमा करो..खैर करिशमा तो वक्त के साथ हो ही जाता है उनमें अगर इन सब को ज़हमत भी न दी जाये तब भी काम तो अपने समय पर ही होता है खैर ये तो आस्था की बात...

किसी ने कहा 3

चरित्र से जो बोला जाएगा किसी को बाहरी जानकारी देनी हो, सामाचार सुनाना हो, गणित, भूगोल पढ़ाना हो तो यह कार्य वाणी मात्र से भी हो सकता है, लिखकर भी किया जा सकता है और वह प्रयोजन आसानी से पूरा हो सकता है । पर यदि चरित्र निर्माण या व्यक्तित्व परिवर्तन करना है तो फिर उसके सामने आदर्श उपस्थित करना ही प्रभावशाली उपाय रह जाता है । प्रभावशाली व्यक्तित्व अपनी प्रखर कार्यपद्धति से अनुप्राणित करके दूसरों को अपना अनुयायी बनाते हैं । संसार के समस्त महामानवों का यही इतिहास है । उन्हें दूसरों से जो कहना था, कराना था, वह उन्होंने पहले स्वयं किया । उसी कर्तृत्व का प्रभाव पड़ा । बुद्ध, गॉंधी, हरिश्चन्द्र आदि ने अपने को एक साँचा बनाया, तब कहीं दूसरे खिलौने, दूसरे व्यक्तित्व उसमें ढलने शुरू हुए