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किसी ने कहा 3

चरित्र से जो बोला जाएगा किसी को बाहरी जानकारी देनी हो, सामाचार सुनाना हो, गणित, भूगोल पढ़ाना हो तो यह कार्य वाणी मात्र से भी हो सकता है, लिखकर भी किया जा सकता है और वह प्रयोजन आसानी से पूरा हो सकता है । पर यदि चरित्र निर्माण या व्यक्तित्व परिवर्तन करना है तो फिर उसके सामने आदर्श उपस्थित करना ही प्रभावशाली उपाय रह जाता है । प्रभावशाली व्यक्तित्व अपनी प्रखर कार्यपद्धति से अनुप्राणित करके दूसरों को अपना अनुयायी बनाते हैं । संसार के समस्त महामानवों का यही इतिहास है । उन्हें दूसरों से जो कहना था, कराना था, वह उन्होंने पहले स्वयं किया । उसी कर्तृत्व का प्रभाव पड़ा । बुद्ध, गॉंधी, हरिश्चन्द्र आदि ने अपने को एक साँचा बनाया, तब कहीं दूसरे खिलौने, दूसरे व्यक्तित्व उसमें ढलने शुरू हुए

जसबीर कलरवि

हमें आता है अब इस ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा कहना यहाँ मिल जाये कुछ मस्ती उसे ही मयकदा कहना चला हूँ मैं तो बस इक बूँद लेकिर मापने सागर तू अब सारे किनारों को ही मेरी अलविदा कहना जो दरिया गुनगुनाता है नदी जब राग सा छेड़े, उसे जा के समुन्दर की ज़रा आबो-हवा कहना। वो तेरी मंजिलों के सब पते ही तुम को देता है, मगर उसकी ये किस्मत तेरा उसको ला-पता कहना। जो उस-से मागते हो तुम वो कुदरत दे ही देती है, इसे अपनी दुआ समझो या फिर उसकी अदा कहना। मैं अपने हर जनम में ही मरा अपनी वफ़ा करके, मुझे कहना नहीं आया किसी को बे-वफ़ा कहना। लकीरें फिर मेरे माथे की अक्सर फट ही जाती है, मेरा जब भी किसी पत्थर को अपना आईना कहना।

23 april 2011

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23 april 2011 23 अप्रेल 2011 दोपहर के12 बज59 मिनट एक तारीख बन गई क्योकि इस दिन मेरी आगोश में मेरा खून था मेरा बेटा ..नौ महिने इसकी मां ने बहुत तकलीफ झेली थी ..कई बार रोई थी कई बार दर्द से करहाही थी ..लेकिन शरीर का दर्द मास के लोथड़े में बदल कर जब दुनिया में आया हर किसी की आंख नम थी खुशी ने एक बार फिर से आंसूओं का सहारा लिया और सर ज़मीने हिनदुस्तान मे अरसलान ने उतरप्रदेश के नोएडा के अस्पताल में जन्म लिया। मुझे नहीं पता तकदीर में आगे क्या लिखा है हां जो अब तक मुझे मिला है काफी संघर्ष से मिला है मेरे बेटे के मुकद्दर में क्या है . आने वाला वक्त बताए गा हां मेरी जो लिखने की धरोवर है वो हर बात ज़रूर लिखे गी चाहे वो मेरे पक्ष में हो या विरोध में ... आप लोगों से इलतिजा करता हूं आप लोग मेरे लख्तेजीगर को एक अच्छा इंसान बनने की दुआ दे और भगवान से ये ज़रूर मांगे कि न कभी उसे और न कभी मुझे और इस देश को हमसे शर्ममिंदगी उठानी और सहनी पड़े..

किसी ने कहा-2

ईश्वर विश्वास मनुष्य जीवन की सार्थकता और सुव्यवस्था के लिए बहुत आवश्यक है । यों तो सामान्य नैतिक सिद्धांतों पर आस्था रखते हुए भी मनुष्य नेक जीवन जी सकता है, अपने व्यक्तिगत उत्कर्ष और सामाजिक उन्नति में सफल योगदान दे सकता है, लेकिन ईश्वर-विश्वास के अभाव में वह कभी भी भटक सकता है । एक सर्वव्यापी, सर्व समर्थ, न्यायकारी सत्ता के रूप में ईश्वर की मान्यता मनुष्य को आदर्शनिष्ठ, समाजनिष्ठ तथा विकासोन्मुख बनाए रखने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है । आस्तिकता को आज उपेक्षणीय और निरर्थक इसलिए माना जाने लगा है कि ईश्वर के सम्बंध में बड़ी भ्रांत मान्यताएँ फैला दी गई हैं । लोग यह समझने लगे हैं कि ईश्वर हम जैसा ही कोई निकृष्ट मनोभूमि वाला व्यक्ति है, जो थोड़ी सी खुशामद से प्रसन्न हो जाता है या पूजा स्तुति करने वालों से संतुष्ट हो जाता है । आज आस्तिक कहलाने वालों की गतिविधियों को देखकर यही निष्कर्ष निकलता है, लेकिन विवेक कहता है कि ऐसी अनैतिक सत्ता ईश्वर तो नहीं हो सकती, शैतान भले हो । कुछ लोग ईश्वर को करुणा-निधान, कृपानिधान तक मानकर ही रह जाते हैं । यह मान्यता सत्य होते हुए भी एकांगी है । ईश्वर जहां पीड़ितों...

किसी ने कहा

एक दार्शनिक का कहना है कि - संसार में आधे उत्पात अनैतिकता के कारण और आधे मानसिक उद्विग्नता के कारण होते हैं । यदि आवेश एवं उद्वेग जैसी मानसिक दुर्बलता पर विजय प्राप्त कर ली जाय तो संसार में फैले हुये संकटों में से आधे तो तुरन्त ही समाप्त हो सकते हैं । अनैतिकता की तरह उद्विग्नता भी मानव जीवन के लिये समान रूप से हानिकारक है, इसलिए जहाँ हमें पापों को दूर करने और धर्म को बढ़ाने के लिये प्रयत्न करना है, वहाँ आवेश ग्रस्त होने के पागलपन को भी ध्यान में रखना है । यदि पाप मिट जाए और असहिष्णुता एवं तुनक मिजाजी इसी प्रकार बने रहे तो संसार की नारकीय स्थिति इसी प्रकार बनी रहेगी । गीताकार ने सुझाया है कि प्रत्येक विचारशील व्यक्ति को मानसिक संतुलन बनाये रहने का अभ्यासी होना चाहिये । प्रिय परिस्थितियों में न तो अहंकार एवं हर्षातिरेक में डूब जाना चाहिये और न थोड़ी सी प्रतिकूलता एवं अड़चन प्रस्तुत देखकर हड़बड़ा जाना चाहिये । दोनों ही स्थितियों में अपनी गंभीरता बनाये रखनी चाहिये और संसार के स्वरूप एवं प्रवाह को समझते हुये धैर्यपूर्वक सब कुछ सुनना, समझना और करना चाहिये ।

दुनिया

दुनिया सब से पहले महसूस होती है सांसों से । जब ज़िन्दगी जन्म लेती है कोख़ में होती है तो उसके लिये दुनिया का मतलब सिर्फ सांसे होता है । जो सांसे अंदर बाहर होती हैं जिस पानी में वो रहती है वो ही उसकी ज़िन्दगी होती और उसी को वो दुनिया समझ लेती है । इस के बाद दुनिया वो है जो आंखों से दिखती है । जो सामने होता है वो दुनिया होती है । जो लोग सामने दिखते है उसका वो ही संसार होता है कितना छोटा सब कुछ आंखो में समाया हुआ। फिर दुनिया अपना रूप बदलती है फिर जो सुनाई देता है वो संसार होता है यानि वो आवाज़े जो किसी माध्यम से हम तक पहुचने लगती है हम उसे ही दुनिया समझ लेते हैं किसी ने जो बताया किसी ने कुछ कहा वो ही हमारा संसार होता जाता और बनता जाता है । फिर दुनिया अपना रूप बदलती है जो समझ में आने लगता है । सासों आंखों और स्वरों से बन कर हमारे दिमाग में पहुचता है वो हमारी दुनिया बन जाती है ...और फिर इस दुनिया को समझने की कोशिश चल पड़ती है ।यानि तकरीबन पांच साल की उम्र से हम दुनिया को समझते आते है पर समझ नहीं पाते .. और एक दिन सीधी चलती हुई दुनिया उल्टी चलने लगती है ... दिमाग काम करना बंद करने लगता है , ...

कितनी अरूणा..

कितनी अरूणा.. यूथोनेशिया कई देशों में लागू है..जैसे अमेरिका में ओरेगॉन ,वाशिंगटन मौंटाना, नीदरलैंड,बेलजियम,लक्ज़बर्ग,सिवटज़रलैंड... भारत की अरूणा नहीं दुनिया में कई अरूणा है जिन्हे मौत का इंतज़ार है . या फिर जिन्हे मौत की मंजूरी मिल चुकी है । 90 के दशक में अमेरिका के फ्लोरिडा में टेरी शियावो का केस सामने आया ।शियावो को 1990 में हार्ट अटैक आया जिसे उनके दिमाग को काफी नुकसान हुआ और क्षति पहुंची ..करीब 8 साल तक वो मौत के साथ संघर्ष करती रही ...फींडीग ट्यूब के सहारे उन्हे खाना दिया जाता रहा जिसके बाद उनके पति ने उनके लिये मौत की सज़ा की मांग की ।कोर्ट को सात साल लगे इजाज़त देने के लिए .इजाज़त के दो हफ्ते बाद शियावो की मौत हुई। 1975 में अमेरिका में ही 21 साल की कैरेन क्विनलन का केस आया था । 21 साल की उम्र में कैरन दवा और शराब एक साथ लेने की वजह से बेहोश हो गई .उन्हे वेंटिलेटर पर रखा गया ।माता पिता ने कोर्ट से वेंटिलेटर हटाने की इजाज़त मांगी ।कोर्ट ने उनके हक में फैसला दिया । इजाज़त मिलने के बाद भी कैरन 10 साल तक ज़िंदा रही । 2010 में ही इंग्लैंड में के गिल्डरडेल नाम की एक औरत पर अपनी 31 सा...